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09 Aug 2026

Children Using Abusive Language in Public Places | बच्चों का गाली देना

Children Using Abusive Language in Public Places | बच्चों का गाली देना

Children Using Abusive Language in Public Places | छोटे-छोटे बच्चों का Public Place में गाली देना, क्या हमारे संस्कार खत्म हो रहे हैं?
आजकल Public Place पर जाते समय एक बात कई लोगों को परेशान करती है—छोटे-छोटे बच्चे भी खुलेआम गालियां और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने लगे हैं।
कभी पार्क में खेलते हुए, कभी स्कूल या कोचिंग के बाहर, कभी बाजार में दोस्तों के साथ और कभी घर के आसपास बच्चों को ऐसी भाषा बोलते हुए सुनना आम होता जा रहा है। सबसे चिंता की बात यह है कि कई बार बच्चों की उम्र इतनी कम होती है कि उनसे ऐसी भाषा की उम्मीद भी नहीं की जाती।
सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि बच्चे गाली क्यों देते हैं? असली सवाल यह है कि बच्चे ऐसी भाषा सीख कहां से रहे हैं और उन्हें यह सामान्य क्यों लगने लगी है?
क्या इसके पीछे घर का माहौल है? Friends Circle है? Mobile और Internet है? Social Media है? या फिर हम बड़े खुद बच्चों के सामने ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं?
बच्चे अक्सर वही सीखते हैं जो वे अपने आसपास देखते और सुनते हैं। इसलिए अगर हम चाहते हैं कि बच्चे Public Place पर सभ्य भाषा बोलें और दूसरों का सम्मान करें, तो शुरुआत केवल बच्चों से नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज से होनी चाहिए।
छोटे बच्चों के मुंह से गाली सुनना चिंता की बात क्यों है?
बच्चों की उम्र सीखने और आदतें बनाने की होती है। इस उम्र में वे आसपास के लोगों की भाषा, व्यवहार और प्रतिक्रिया को बहुत जल्दी सीख सकते हैं।
कई बार बच्चा किसी शब्द का पूरा अर्थ जाने बिना उसे बोलना शुरू कर देता है। उसे लगता है कि यह केवल दोस्तों के बीच मजाक है या इससे दूसरे लोग हंसते हैं।
लेकिन धीरे-धीरे वही शब्द उसकी बोलचाल का हिस्सा बन सकता है।
अगर बच्चे को समय पर सही और गलत भाषा का अंतर समझाया नहीं जाए तो आगे चलकर यह आदत उसके व्यवहार और Social Personality को भी प्रभावित कर सकती है।
1. बच्चे गालियां सीखते कहां से हैं?
बच्चे अचानक गाली देना शुरू नहीं करते। आमतौर पर उन्हें ऐसी भाषा किसी न किसी source से सुनने को मिलती है।
इसके कई कारण हो सकते हैं:
  • घर में बड़े लोगों की बातचीत
  • दोस्तों का प्रभाव
  • School या आसपास का माहौल
  • Social Media Videos
  • Short Videos और Reels
  • Online Games की Chat
  • Movies या Web Content
  • आसपास के लोगों की भाषा
  • बड़े भाई-बहनों का व्यवहार
कई बार Parents घर में सामान्य बातचीत के दौरान ऐसे शब्द बोल देते हैं और उन्हें लगता है कि बच्चा ध्यान नहीं दे रहा।
लेकिन बच्चे सुनते हैं और बहुत कुछ याद भी रखते हैं।
2. बच्चे वही दोहराते हैं जो वे देखते हैं
बच्चे केवल हमारी बातें नहीं सुनते, बल्कि हमारे व्यवहार से भी सीखते हैं।
अगर घर में किसी समस्या पर गुस्सा आते ही गाली देना सामान्य माना जाता है, तो बच्चा भी यह समझ सकता है कि गुस्सा व्यक्त करने का यही तरीका है।
अगर घर में सम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल किया जाता है तो बच्चे को भी उसी तरह बोलने की आदत विकसित करने में मदद मिल सकती है।
इसलिए बच्चों को अच्छी भाषा सिखाने से पहले बड़ों को खुद उदाहरण बनना होगा।
3. Friends Circle का भी बड़ा प्रभाव
बच्चों के बड़े होने के साथ उनका Friends Circle बढ़ता है।
कई बार बच्चे अपने दोस्तों से ऐसे शब्द सुनते हैं और बिना अर्थ समझे उन्हें दोहराने लगते हैं।
कुछ बच्चे दोस्तों के बीच गाली को मजाक समझते हैं। उन्हें लगता है कि ज्यादा गाली देने से वे Cool या Funny दिखाई देंगे।
Parents को बच्चों की हर दोस्ती पर शक करने की जरूरत नहीं है, लेकिन अगर बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई दे तो उससे शांत तरीके से बात करना जरूरी है।
4. Mobile और Social Media का प्रभाव
आजकल बच्चे बहुत कम उम्र में Smartphone और Internet से जुड़ रहे हैं।
Internet पर Educational Content के साथ-साथ ऐसा Content भी मौजूद है जिसमें गाली-गलौज, अपमानजनक भाषा और Aggressive Behaviour को Entertainment की तरह दिखाया जाता है।
बच्चे अगर लगातार ऐसा Content देखते हैं तो उन्हें ऐसी भाषा सामान्य लग सकती है।
इसलिए Parents को बच्चों के Screen Time के साथ-साथ Content Quality पर भी ध्यान देना चाहिए।
सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि बच्चा कितने घंटे Phone चला रहा है। यह भी देखना जरूरी है कि वह Phone पर क्या देख रहा है।
5. Public Place में गाली देना क्यों गलत है?
Public Place सभी लोगों के लिए साझा स्थान होता है।
Park, Market, School के आसपास, Bus Stand, Hospital, Restaurant या किसी Family Function में छोटे बच्चों का लगातार गाली देना आसपास के लोगों के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है।
बच्चों को यह समझाना चाहिए कि हर जगह एक जैसा व्यवहार नहीं किया जा सकता।
घर में भी सम्मानजनक भाषा जरूरी है और Public Place में तो और भी अधिक।
6. क्या बच्चे को सबके सामने डांटना चाहिए?
अगर बच्चा Public Place पर गाली देता है तो उसे सबके सामने बहुत ज्यादा अपमानित करना सही तरीका नहीं हो सकता।
ऐसा करने से बच्चा जिद कर सकता है, शर्मिंदा हो सकता है या आगे से अपनी गलतियां छिपाने की कोशिश कर सकता है।
बेहतर तरीका है कि Parents बच्चे को एक तरफ ले जाकर शांत तरीके से समझाएं।
उसे बताएं:
“यह शब्द सही नहीं है। Public Place में हमें दूसरों का सम्मान करना चाहिए।”
अगर बच्चा छोटा है और उसे शब्द का अर्थ भी नहीं पता तो पहले यह समझें कि उसने वह शब्द सीखा कहां से।
7. बच्चे को केवल “गाली मत दो” कहना पर्याप्त नहीं
अगर Parents केवल यह कहते रहें कि “गाली मत दो”, तो बच्चे को यह समझ नहीं आएगा कि गुस्सा या frustration व्यक्त कैसे करना है।
उसे Alternative Words और Behaviour सिखाना जरूरी है।
उदाहरण के लिए:
गुस्सा आए तो कहना—“मुझे गुस्सा आ रहा है।”
किसी बात से परेशानी हो तो कहना—“मुझे यह अच्छा नहीं लगा।”
दोस्त से समस्या हो तो कहना—“मेरी बात सुनो।”
किसी चीज से असहमति हो तो कहना—“मैं इससे सहमत नहीं हूं।”
इस तरह बच्चा धीरे-धीरे सीख सकता है कि अपनी Feelings को गाली के बिना भी व्यक्त किया जा सकता है।
8. बच्चों को “Respectful Language” सिखाएं
बच्चों को छोटी उम्र से ही कुछ Basic Social Habits सिखानी चाहिए।
जैसे:
  • Please कहना
  • Thank You कहना
  • Sorry कहना
  • दूसरों की बात बीच में न काटना
  • बड़ों से सम्मानपूर्वक बात करना
  • छोटे बच्चों के साथ प्यार से व्यवहार करना
  • किसी की Appearance का मजाक न उड़ाना
  • गुस्से में भी अपशब्दों का इस्तेमाल न करना
ये छोटी-छोटी बातें बच्चे के Personality Development में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
9. “मजाक में गाली” को भी सामान्य न बनाएं
कई बार बच्चे कहते हैं कि “हम तो मजाक कर रहे थे।”
लेकिन हर मजाक सही नहीं होता।
किसी व्यक्ति को उसकी Family, Appearance, Background या किसी Personal बात को लेकर अपमानित करना मजाक नहीं माना जाना चाहिए।
बच्चों को यह अंतर समझाना जरूरी है कि Funny होना और किसी का अपमान करना दो अलग चीजें हैं।
10. Parents को बच्चों से दोस्त की तरह बात करनी चाहिए
अगर बच्चा Parents से डरता है तो वह कई चीजें छिपा सकता है।
इसके बजाय घर में ऐसा माहौल होना चाहिए जहां बच्चा अपनी गलती भी बता सके।
Parents पूछ सकते हैं:
“तुमने यह शब्द कहां सुना?”
“तुम्हें इसका मतलब पता है?”
“तुम्हारे दोस्त ऐसा बोलते हैं?”
“क्या किसी Video में सुना?”
इस तरह सवाल पूछने से समस्या का कारण समझने में आसानी हो सकती है।
11. बच्चों के सामने बड़े खुद गाली न दें
यह सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक है।
हम बच्चों से कहते हैं:
“गाली मत दो।”
लेकिन अगर घर के बड़े खुद गुस्से में गाली देते हैं तो बच्चे के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि सही क्या है।
इसलिए बच्चों के सामने भाषा पर नियंत्रण रखना जरूरी है।
बच्चे को अच्छी भाषा सिखाने का सबसे प्रभावी तरीका केवल Lecture देना नहीं, बल्कि खुद अच्छी भाषा का उदाहरण प्रस्तुत करना है।
12. घर में Simple Family Rule बनाएं
Parents घर में एक छोटा सा Rule बना सकते हैं:
“हमारे घर में किसी को गाली नहीं देंगे।”
यह Rule बच्चों और बड़ों दोनों पर लागू होना चाहिए।
अगर कोई गलती से गलत शब्द बोल दे तो उसे तुरंत सुधारने की आदत बनाई जा सकती है।
इससे धीरे-धीरे घर का Communication Environment बेहतर हो सकता है।
13. बच्चे को गलत भाषा बोलने पर Reward न दें
कई बार बच्चे कोई गाली बोलते हैं और आसपास के लोग हंसने लगते हैं।
बच्चा समझ सकता है कि उसने कुछ Funny किया है और उसे Attention मिल रहा है।
ऐसी स्थिति में हंसने या उसे दोबारा बोलने के लिए उकसाने के बजाय शांत तरीके से समझाएं कि वह शब्द उचित नहीं है।
बच्चे को गलत भाषा के लिए Extra Attention न देना उपयोगी हो सकता है।
14. School और Parents मिलकर काम करें
अगर बच्चा लगातार अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहा है तो Parents को School Teachers से भी बातचीत करनी चाहिए।
Teacher बच्चे के School Behaviour के बारे में बेहतर जानकारी दे सकते हैं।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर छोटी गलती पर बच्चे को “Bad Child” घोषित कर दिया जाए।
बच्चे के व्यवहार को सुधारने का उद्देश्य उसे Label करना नहीं, बल्कि उसे सही दिशा देना होना चाहिए।
15. बच्चों के लिए Positive Environment बनाएं
बच्चों को केवल गलत चीजों से रोकना पर्याप्त नहीं है।
उनके आसपास Positive Environment बनाना भी जरूरी है।
उन्हें:
  • Sports
  • Books
  • Drawing
  • Music
  • Outdoor Games
  • Creative Activities
  • Family Conversation
  • Educational Content
के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
जब बच्चे के पास Healthy Activities होती हैं तो उसका ध्यान केवल Mobile या Negative Content पर निर्भर नहीं रहता।
Gurugram जैसे शहरों में Public Behaviour क्यों जरूरी है?
Gurugram में Parks, Markets, Schools, Coaching Centres, Shopping Areas और अलग-अलग Public Places पर रोजाना बड़ी संख्या में परिवार और बच्चे आते-जाते हैं।
ऐसे स्थानों पर बच्चों का व्यवहार केवल परिवार की पहचान नहीं बनाता, बल्कि Social Behaviour का भी हिस्सा होता है।
अगर बच्चे छोटी उम्र से ही Public Place में दूसरों का सम्मान करना, सभ्य भाषा बोलना और अपनी Feelings को सही तरीके से व्यक्त करना सीखते हैं तो यह उनकी Personality के लिए लंबे समय तक उपयोगी हो सकता है।
Gurugram के Parents को भी बच्चों के Digital और Real-Life Behaviour दोनों पर ध्यान देना चाहिए।
क्या “आजकल के बच्चों में संस्कार नहीं रहे” कहना सही है?
हर बच्चे को देखकर यह कहना कि आजकल के बच्चों में संस्कार नहीं हैं, सही नहीं होगा।
बहुत से बच्चे बेहद सभ्य, जिम्मेदार और सम्मानजनक व्यवहार करते हैं।
समस्या को केवल बच्चों के संस्कार की कमी मानने के बजाय हमें यह देखना चाहिए कि बच्चे क्या सुन रहे हैं, क्या देख रहे हैं और उनके आसपास के बड़े कैसे व्यवहार कर रहे हैं।
बच्चे समाज का हिस्सा हैं। उनकी भाषा में समाज की झलक भी दिखाई देती है।
इसलिए अगर हम बच्चों में बदलाव चाहते हैं तो हमें अपने घर, आसपास और Digital Environment पर भी ध्यान देना होगा।
Parents के लिए आसान Checklist
अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा Public Place में सभ्य भाषा बोले तो:
✔ बच्चों के सामने गाली देने से बचें।
✔ बच्चे के Friends Circle को समझें।
✔ Mobile पर देखे जाने वाले Content पर उम्र के अनुसार ध्यान दें।
✔ बच्चे से खुलकर बातचीत करें।
✔ गलत शब्द का अर्थ समझाएं।
✔ गुस्सा व्यक्त करने के सही तरीके सिखाएं।
✔ Public Place के Behaviour Rules समझाएं।
✔ बच्चे की गलती पर सबके सामने अपमान न करें।
✔ अच्छे व्यवहार की प्रशंसा करें।
✔ खुद भी बच्चों के सामने अच्छा उदाहरण बनें।
निष्कर्ष
छोटे बच्चों के मुंह से गाली सुनना निश्चित रूप से चिंता का विषय हो सकता है, लेकिन केवल यह कह देना कि “आजकल के बच्चों के संस्कार खत्म हो गए हैं” समस्या का समाधान नहीं है।
हमें यह समझना होगा कि बच्चे ऐसी भाषा सीख कहां से रहे हैं।
घर का माहौल, Friends Circle, Mobile, Social Media, Videos और आसपास के लोगों का व्यवहार बच्चों की भाषा पर प्रभाव डाल सकता है।
अगर Parents चाहते हैं कि उनके बच्चे Public Place में सम्मानजनक भाषा बोलें तो उन्हें केवल डांटने के बजाय समझाना, सही उदाहरण देना और अच्छी भाषा का अभ्यास करवाना ज्यादा प्रभावी हो सकता है।
बच्चों को यह सिखाना जरूरी है कि गुस्सा आना गलत नहीं है, लेकिन गुस्से में किसी को गाली देना सही तरीका नहीं है।
बच्चों को संस्कार केवल किताबों और भाषणों से नहीं मिलते—वे घर में बड़ों के व्यवहार, बातचीत और रोजमर्रा की जिंदगी से भी सीखते हैं।
इसलिए बदलाव की शुरुआत बच्चों से पहले हम खुद से करें।
एक छोटी सी बात याद रखें
“बच्चे हमारे शब्दों से कम और हमारे व्यवहार से ज्यादा सीखते हैं।”
अगर हम चाहते हैं कि अगली पीढ़ी Public Place में सम्मानजनक भाषा बोले, दूसरों की इज्जत करे और अच्छे संस्कारों के साथ बड़ी हो, तो आज से ही हमें अपने घर और समाज में सकारात्मक माहौल बनाना होगा।

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